Monday, May 16, 2011

सोचा ना था...

इतनी उम्मीदे मेरी टूटेंगी सोचा ना था,
महफ़िल मेरी छूटेगी सोचा ना था,
हर आंसू के बदले हंसाया जाता था,
हंसी भी कभी रोएगी सोचा ना था,
आँखें बंद करने पर भी देखती थी जिनको,
आस-पास ना पाउंगी सोचा ना था,
गिरने की फ़िक्र कभी होती ना थी,
चलने से भी घबराउंगी सोचा ना था,
सबमे खो कर खुश थी इतना,
खुद को ना पाऊँगी सोचा ना था,
इतनी उम्मीदे मेरी टूटेंगी सोचा ना था,
महफ़िल मेरी छूटेगी सोचा ना था.

9 comments:

  1. yahi sochta hun main bhi aksar
    sath me friend na honge
    hoga facebook aur twiter

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  2. हर आंसू के बदले हंसाया जाता था,
    हंसी भी कभी रोएगी सोचा ना था,
    आँखें बंद करने पर भी देखती थी जिनको,
    आस-पास ना पाउंगी सोचा ना था,

    क्या लिखा है आपने ..वाह!

    सादर

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  3. bahut dino baad ...... achche udgaar ..... keep it up ishaa!!

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  4. aapki kavita padhkar laga kya kabhi aisa bhi mere sath hoga socha na tha

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  5. @ archana,meraj,sanjay ji, yashwant ji,sir nd sanjeev ji aap sabhi ka bht bht dhanyawaad..!!

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  6. बहुत खूबसूरती के साथ शब्दों को पिरोया है इन पंक्तिया में आपने

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