Saturday, October 8, 2011

क्या करे ?

जो दिल में बसते हो आपके
वहां रहना ही ना चाहे,
तो क्या करे ?

जब सवालों की गठरी
भारी होती जाए
जवाब ना मिले,
तो क्या करे ?

जब मद्धम आवाज़
सुनना चाहे दिल
सिर्फ रूदन सुनाई पड़े,
तो क्या करे ?

जब दर्द शब्दों में
बयां करना चाहे
और होठ कपकपाये
तो क्या करे ?

पलकों में बसा
रखे हो आंसू
आँखे बरसने ना पाए
तो क्या करे ?

जब ठहरना चाहे
किसी मुकां पे
आंधी में पत्ते की तरह
उड़ते चले जाए
तो क्या करे ?

जब सुकूं की तलाश हो
रूह थरथराती ही जाए
तो क्या करे ?

जब किसी के
कदमो के निशाँ
कैद करना चाहे
लहरें उसे मिटाती
चली जाए
तो क्या करे ?

जब तस्वीर कोई उकेरने
को दिल करे
कलम साथ ही ना दे
तो क्या करे ?

जब वक़्त को थामना चाहे
और लम्हा अहिस्ता अहिस्ता
गुज़रता चला जाए
तो क्या करे ?

जो आपकी हसी पे
मरते थे कभी
आपकी मौत की
खबर पर मुस्कुराए
तो क्या करे ?

3 comments:

  1. Kavita bahut achha hi.
    aap is blog bhi dekhiya
    http://jahnavi05.blogspot.com

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  2. बहुत ही प्यारी रचना....

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