Saturday, October 2, 2010

ज़िन्दगी की खोज

खतरे बहुत आयेंगे राह में, मुश्किलें भी आयेंगी,
घबराना नहीं ऐ दिल मेरे, ऑंखें आंसू भी बहायेंगी

चाहे पथरीले हो रास्ते, चाहे अँधकार फैला हो,
तू खुद में आग जलाये रखना, चाहे समाज कितना भी मैला हो

आशा की नाव को, मेहनत से करना पार,
याद रख कमज़ोर ही, मानते है हार

कोई दिन कभी सतायेगा, कोई षण कभी रुलायेगा,
फिर भी बढ़ना आगे, एक दिन तू ही मुस्कुरायेगा

बहुत होंगे तेरे विरोधी, कदम पीछे खीचेंगे,
जब देखना चाहेगा सच्चाई, आँख तेरी मीचेंगे,

न करना खुद को कमज़ोर, मंजिल होगी आगे खड़ी
सफ़र भी करना तय ऐसे, याद आये हर घडी

इंसान वही है जिसने, तक़दीर अपने हाथों से लिखी,
वह तो बुत है जिसको किस्मत अपनी लकीरों में दिखी,

तय कर तू है बुत या है इंसान,
ख़ोजना उत्तर सत्य, अन्यथा तू ज़िन्दगी से बईमान |

5 comments:

  1. जिंदगी के अंदाज़ अलग|
    कुछ पल कैसे खास अलग |
    सोच के जीना ए मत बंदे |
    शमा जलेगी खास अलग |

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  2. बहुत अच्छा लिखा है आपने.
    यह पोस्ट आज यहाँ है-http://nayi-purani-halchal.blogspot.com/2011/06/blog-post_10.html

    सादर

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  3. इंसान वही है जिसने, तक़दीर अपने हाथों से लिखी,
    वह तो बुत है जिसको किस्मत अपनी लकीरों में दिखी,

    तय कर तू है बुत या है इंसान,
    ख़ोजना उत्तर सत्य, अन्यथा तू ज़िन्दगी से बईमान |
    बहुत बढिया !!

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  4. मुझे आप को सुचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि
    आप की ये रचना 24-05-2013 यानी आने वाले शुकरवार की नई पुरानी हलचल
    पर लिंक की जा रही है। सूचनार्थ।
    आप भी इस हलचल में शामिल होकर इस की शोभा बढ़ाना।

    मिलते हैं फिर शुकरवार को आप की इस रचना के साथ।

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