Friday, October 29, 2010

नादान दिल

दूर हो के भी दूरी का एहसास नहीं होता,
पास होके भी दिल पास नहीं होता,
न समझ है ये, नादान भी है,
अपने से परेशान भी है,
फँस जाता है कभी ये भवर में,
कभी अट्खेलिया भी करता है,
कभी शांत रहता है ,
कभी शरारत भी करता है,
जब रूठता है ये खुद से,
बड़े प्यार से झगड़ता  भी है,
कभी खुद से नाराज़ है ये,
कभी खुद को ही मनाता भी है,
कभी धधकता है ये आग सा,
कभी है शीतल एहसास सा,
हर पल अलग रंग है इसका,
शायद यही ढंग है इसका,
कैसे समझाऊ इस दिल को मैं,
या यूँ ही नासमझ रहने दू,
कभी सोचती हूँ मैं,
क्यूँ ना इसको यूँ ही जीने दू |

14 comments:

  1. "...कभी सोचती हूँ मैं,
    क्यूँ ना इसको यूँ ही जीने दू ...."

    बेहद खूबसूरत भाव!

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  2. लेखन अपने आपमें रचनाधर्मिता का परिचायक है. लिखना जारी रखें, बेशक कोई समर्थन करे या नहीं!

    बिना आलोचना के भी लिखने का मजा नहीं!

    यदि समय हो तो आप निम्न ब्लॉग पर लीक से हटकर एक लेख

    "आपने पुलिस के लिए क्या किया है?"
    पढ़ सकते है.

    http://baasvoice.blogspot.com/
    Thanks.

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  3. खूबसूरत रचना

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  4. बहुत सुन्दर रचना है ! निरंतर प्रयासरत रहे |
    स्वागत है आपका इस अनोखी दुनिया में !

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  5. @ veena ji, समय (sorry mujhe aapka naam nahi gyaat hai), rambabu singh ji aap sabhi ka shukriya..!!

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  6. दूर हो के भी दूरी का एहसास नहीं होता,
    पास होके भी दिल पास नहीं होता,..

    बेहद खूबसूरत भाव!!!!!!!!!!!!!!

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  7. ब्लाग जगत की दुनिया में आपका स्वागत है। आप बहुत ही अच्छा लिख रहे है। इसी तरह लिखते रहिए और अपने ब्लॉग को आसमान की उचाईयों तक पहुंचाईये मेरी यही शुभकामनाएं है आपके साथ
    ‘‘ आदत यही बनानी है ज्यादा से ज्यादा(ब्लागों) लोगों तक ट्प्पिणीया अपनी पहुचानी है।’’
    हमारे ब्लॉग पर आपका स्वागत है।

    मालीगांव
    साया
    लक्ष्य

    हमारे नये एगरीकेटर में आप अपने ब्लाग् को नीचे के लिंको द्वारा जोड़ सकते है।
    अपने ब्लाग् पर लोगों लगाये यहां से
    अपने ब्लाग् को जोड़े यहां से

    कृपया अपने ब्लॉग पर से वर्ड वैरिफ़िकेशन हटा देवे इससे टिप्पणी करने में दिक्कत और परेशानी होती है।

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  8. surendra ji aapki shubhkaamnaao k liye bht bht shukriya..!!

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